दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों की पहचान बन चुकी टेस्ला इस समय गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। अमेरिका में कंपनी की बिक्री चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है, जबकि भारत जैसे उभरते बाज़ार में इसकी शुरुआत उम्मीदों के अनुरूप नहीं रही।
अमेरिका में बड़ी गिरावट, सस्ते मॉडल भी नहीं दे पाए सहारा
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2024 में टेस्ला की अमेरिका में बिक्री 23% घटकर 39,800 यूनिट रह गई। यह गिरावट उस समय सामने आई जब कंपनी ने Model Y और Model 3 के किफायती स्टैंडर्ड वेरिएंट्स लॉन्च किए थे।
उम्मीद थी कि लगभग 5,000 डॉलर सस्ते ये मॉडल टैक्स क्रेडिट खत्म होने के बाद बिक्री को संभालेंगे, लेकिन सितंबर में फेडरल टैक्स क्रेडिट 7,500 डॉलर हटने के बाद से पूरा ईवी बाजार सुस्त पड़ गया।
इसका असर न केवल नए सस्ते वेरिएंट पर पड़ा, बल्कि महंगे मॉडल—खासकर Model 3—की बिक्री भी कम हो गई।
कंपनी की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि आने वाले वर्षों में टेस्ला रोबोटैक्सी और ह्यूमनॉइड रोबोट जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर दांव लगा रही है, जिनके लिए मजबूत बाज़ार प्रदर्शन बेहद जरूरी है।
भारत में टेस्ला की धीमी शुरुआत
भारत के लग्ज़री ईवी बाज़ार में टेस्ला ने सितंबर में कदम रखा था, लेकिन शुरुआती बिक्री बेहद धीमी रही।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर से नवंबर के बीच कंपनी की कुल बिक्री सिर्फ 157 यूनिट रही।
नवंबर में यह आंकड़ा और घटकर 48 यूनिट पर पहुंच गया।
तुलना में:
- BMW ने 267 इलेक्ट्रिक कारें बेचीं
- Mercedes-Benz भी प्रीमियम सेगमेंट में मजबूत पकड़ बनाए हुए है
भारत में टेस्ला की सीमित बिक्री के पीछे कीमतें, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और पहले से स्थापित ब्रांडों की प्रतिस्पर्धा प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
कंपनी की वैश्विक रणनीति पर उठे सवाल
अमेरिका में बिक्री का गिरना और भारत में कमजोर शुरुआत टेस्ला के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े करता है।
ईवी मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, सरकारी प्रोत्साहन में कटौती, और बदलती मांग टेस्ला के लिए नई चुनौतियाँ बन रही हैं।
अगर आने वाले महीनों में कंपनी अपने प्रमुख बाज़ारों में स्थिरता नहीं ला पाती, तो इसका सीधा असर टेस्ला की long-term योजनाओं और वैश्विक उपस्थिति पर पड़ सकता है।