पंजाब भर में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर आयोजित स्मृति कार्यक्रम बड़े भाव से सम्पन्न हो गए। राज्य सरकार ने इन आयोजनों को बड़े स्तर पर करते हुए यह संदेश दिया कि पंजाब गुरुओं की शिक्षाओं और पंथक परंपराओं को सर्वोच्च मान देता है। पूरे राज्य में श्रद्धा, एकता और आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण बना रहा।
तीन तख्त साहिबों के आसपास ‘पवित्र नगरी’ का दर्जा
राज्य स्तरीय समागम के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि
- श्री केसगढ़ साहिब,
- श्री दमदमा साहिब,
- और श्री फतेहगढ़ साहिब
के आध्यात्मिक गलियारों को अब ‘पवित्र नगरी’ घोषित किया जाएगा।
यह कदम इन पवित्र स्थलों के संरक्षण, विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अगला (351वां) राज्य स्तरीय शहीदी दिवस भी श्री आनंदपुर साहिब में ही आयोजित होगा, जिससे इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता और मजबूत होगी।
2027 के लिए बदलते पंथक समीकरण
पंजाब की पंथक राजनीति में शिरोमणि अकाली दल का वर्षों तक मजबूत प्रभाव रहा है। लेकिन पिछले ढाई–तीन वर्षों में आम आदमी पार्टी ने भी पंथक मुद्दों पर अपनी पकड़ मजबूत की है।
‘सरबत दा भला एकत्रता’ कार्यक्रम में संगत द्वारा 2027 में फिर भगवंत मान को मुख्यमंत्री बनाने की अरदास इस बात का संकेत है कि सरकार की पंथक सेवा की दिशा लोगों को सकारात्मक लग रही है।
सत्ता नहीं, सेवा हमारा असली उद्देश्य: मान और केजरीवाल
समागम में मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपस्थित संगत को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल सत्ता नहीं है, बल्कि गुरुओं के मार्ग पर चलकर सच्ची पंथ सेवा करना है।
दोनों नेताओं ने कहा कि पंजाब की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना और समाज में भाईचारा बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।
मंत्रियों ने भी जताया सेवा का संकल्प
कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ मंत्रियों और नेताओं—
- हरजोत सिंह बैंस,
- अमन अरोड़ा,
- अनमोल गगन मान,
- सांसद मलविंदर कांग,
- पर्यटन मंत्री तरुणप्रीत सौंद—
ने भी संगत को भरोसा दिलाया कि वे जनता की सेवा में हमेशा तत्पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि संगत का प्यार और समर्थन ही उन्हें सेवा की ऊर्जा देता है।
पंथक विरासत को सम्मान देने की दिशा में मजबूत पहल
पूरे राज्य में आयोजित स्मृति कार्यक्रमों ने पंजाब की आध्यात्मिक पहचान को नई मजबूती दी है। पवित्र नगरी की घोषणा जैसे फैसले न केवल धार्मिक धरोहर की रक्षा करेंगे, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को गुरुओं की शिक्षाओं से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
इन ऐतिहासिक पहलों ने स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब सरकार पंथक मूल्यों को आगे बढ़ाने और समाज में एकता व सद्भाव बनाए रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है।