पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक बार फिर दोहराया कि पंजाब को उसके वैध अधिकारों से वंचित करने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होने दी जाएगी। सोमवार, 26 जनवरी को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने राज्य से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
“चंडीगढ़ पंजाब का था, है और रहेगा”
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि चंडीगढ़ को पंजाब से गलत तरीके से अलग किया गया। उन्होंने दो टूक कहा कि चंडीगढ़ पंजाब का अभिन्न हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। सीएम मान ने बताया कि उनकी सरकार चंडीगढ़ को पंजाब की पूर्ण राजधानी बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करती रहेगी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से ही पंजाब को उसकी राजधानी से दूर रखा गया, जबकि देश के निर्माण में पंजाब ने सबसे बड़ी कुर्बानियां दी हैं।
पंजाब यूनिवर्सिटी और जल अधिकारों पर चिंता
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पंजाब विश्वविद्यालय और राज्य के जल अधिकारों को कमजोर करने की लगातार कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि रोज नए तरीके अपनाए जा रहे हैं ताकि पंजाब को उसके हक से वंचित किया जा सके। सीएम मान ने साफ किया कि पंजाब के जल संसाधन पंजाब के हैं और उनकी सरकार किसी भी कीमत पर इनसे समझौता नहीं करेगी।
अलग हाईकोर्ट न होना दुर्भाग्यपूर्ण
सीएम मान ने कहा कि यह बेहद अफसोस की बात है कि पंजाब का अपना अलग हाईकोर्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि देश के कई छोटे राज्यों तक के अपने उच्च न्यायालय हैं, लेकिन पंजाब जैसे बड़े और ऐतिहासिक राज्य को आज भी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता है। मामलों की भारी संख्या के कारण आम लोगों को न्याय के लिए सालों इंतजार करना पड़ता है।
देश का अन्नदाता, फिर भी सबसे ज्यादा नुकसान
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब देश का अन्नदाता है और देश की सुरक्षा में भी उसकी अहम भूमिका रही है। इसके बावजूद राज्य को प्राकृतिक संसाधनों का भारी नुकसान झेलना पड़ा है। भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, नदियां प्रदूषित हो चुकी हैं और खेती पर संकट बढ़ता जा रहा है।
BBMB से जुड़ी साजिश नाकाम
सीएम मान ने आरोप लगाया कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के जरिए पंजाब के अधिकारों को खत्म करने की साजिश की गई थी, जिसे उनकी सरकार ने नाकाम कर दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पंजाब के जल अधिकार पूरी मजबूती से सुरक्षित रखे जाएंगे।