पंजाब में खेती को टिकाऊ बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने खरीफ की मक्की की सफल खेती करने वाले किसानों को सम्मानित किया है। खरीफ मक्की पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद सरकार ने उन प्रगतिशील किसानों की सराहना की, जिन्होंने अधिक पानी खपत वाली धान की फसल छोड़कर मक्की की खेती को अपनाया।
इस मौके पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने किसानों को प्रशंसा प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया और उन्हें दूसरे किसानों को भी मक्की की खेती के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस पायलट प्रोजेक्ट के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं और सरकार अगले सीजन में इसे और बड़े स्तर पर लागू करने पर विचार कर रही है।
कृषि मंत्री ने बताया कि खरीफ की मक्की फसली विविधता बढ़ाने, गिरते भूजल स्तर को रोकने, मिट्टी की सेहत सुधारने और किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हुई है। मक्की धान की तुलना में कम पानी वाली फसल है, इसलिए यह पंजाब के लिए एक टिकाऊ विकल्प बन सकती है। उन्होंने कहा कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय और उद्योग जगत के सहयोग से एक ठोस नीति तैयार की जा रही है, ताकि पंजाब को मक्की उत्पादन में अग्रणी राज्य बनाया जा सके।
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस साल बठिंडा, संगरूर, गुरदासपुर, जालंधर, कपूरथला और पठानकोट जिलों में मक्की की खेती को बढ़ावा दिया गया। कुल 3,708 से अधिक किसानों ने करीब 11,326 एकड़ जमीन पर धान की जगह मक्की की खेती की, जो अपने आप में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
कृषि मंत्री ने बताया कि कभी 1970 के दशक में पंजाब में मक्की की खेती का रकबा 5.5 लाख हेक्टेयर से ज्यादा था, लेकिन समय के साथ धान की खेती बढ़ने से यह घटकर करीब एक लाख हेक्टेयर रह गया। अब सरकार इस पुराने रुझान को बदलने की दिशा में काम कर रही है।
इस योजना की सफलता के पीछे पांच प्रमुख स्तंभ रहे। इनमें 200 प्रशिक्षित ‘किसान मित्रों’ द्वारा तकनीकी सहायता, प्रति हेक्टेयर 17,500 रुपये की सीधी आर्थिक मदद, आधुनिक मशीनों पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, पीएयू के विशेषज्ञों का वैज्ञानिक मार्गदर्शन और मार्कफेड द्वारा मक्की की उचित कीमत सुनिश्चित करना शामिल है।
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपने अनुभव भी साझा किए। पठानकोट के किसान संसार सिंह और गुरपाल सिंह ने बताया कि उन्हें प्रति एकड़ 25-26 क्विंटल तक उत्पादन मिला और मक्की 2,700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिकी, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा है।
कृषि विभाग के सचिव अरशदीप सिंह थिंद ने कहा कि यह पायलट प्रोजेक्ट आने वाले समय के लिए एक मजबूत मॉडल साबित हुआ है। सरकार का लक्ष्य अब ज्यादा से ज्यादा किसानों को इससे जोड़कर खेती को लाभदायक और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।