ठंड में पानी कम पीने की आदत हो सकती है नुकसानदायक, जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ

सर्दियां शुरू होते ही ज्यादातर लोगों की प्यास कम हो जाती है। ठंडा मौसम शरीर में पानी की जरूरत महसूस होने से रोक देता है, जिसके कारण लोग दिनभर में बहुत कम पानी पीते हैं। कई लोग तो आधा लीटर से भी कम पानी पीते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि पानी की कमी धीरे-धीरे कई तरह की गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।

किडनी पर बढ़ सकता है दबाव
बहुत कम पानी पीने से किडनी को शरीर से अपशिष्ट पदार्थ निकालने में मुश्किल होती है। कम पानी मिलने पर मूत्र गाढ़ा होने लगता है और शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। ऐसे हालात में किडनी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक यह स्थिति किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता को कमजोर कर सकती है और किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।

दिमाग की कार्यक्षमता पर असर
पानी कम पीने का असर सीधे दिमाग तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा पर पड़ता है। डिहाइड्रेशन के कारण ब्लड वॉल्यूम कम होता है, जिससे ब्रेन को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसका असर फोकस कम होने, चिड़चिड़ापन, थकान और मूड स्विंग के रूप में देखने को मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार पानी की कमी दिमागी सेहत को भी प्रभावित कर सकती है।

ऊर्जा घटती है और मसल्स में दर्द बढ़ता है
पानी शरीर की मांसपेशियों को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। कम पानी पीने से मसल्स को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती, जिससे थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। कई लोगों में मांसपेशियों में दर्द और जकड़न भी देखने को मिलती है। ठंड के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है क्योंकि शरीर को गर्म रखने में भी पानी की अहम भूमिका होती है।

पाचन प्रक्रिया प्रभावित
पानी पाचन क्रिया को तेज रखने में महत्वपूर्ण है। जब शरीर में पानी कम होता है, तो पाचन धीमा पड़ जाता है। इससे कब्ज, गैस और अपच जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। इसके अलावा, भूख भी कम लगने लगती है, जिससे शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता।

लंबे समय में गंभीर परिणाम
सर्दियों में रोजाना कम पानी पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन लगातार बढ़ता जाता है। इससे पेशाब गाढ़ा होना, शरीर का तापमान नियंत्रित न रहना, किडनी फिल्ट्रेशन रेट घट जाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय में यह क्रॉनिक हेल्थ कंडीशन का कारण बन सकती हैं जो आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकती हैं।

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