बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन का मास्टरस्ट्रोक: तेजस्वी यादव सीएम उम्मीदवार, मुकेश सहनी को मिली बड़ी जिम्मेदारी

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले जारी सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं पर अब विराम लग गया है। बुधवार को महागठबंधन ने पटना में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित कर दिया। वहीं, मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया है।
यह ऐलान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने किया, जिन्होंने कहा कि यह निर्णय सभी सहयोगी दलों की सहमति से लिया गया है।


तेजस्वी यादव बोले – जनता बदलाव चाहती है

मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में जनता और सहयोगी दलों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा,
“हम बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लेकर मैदान में उतरे हैं। लालू जी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सभी साथियों का आभार जताता हूं जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया।”
तेजस्वी ने एनडीए पर हमला करते हुए कहा, “ये थके हुए लोग हैं, जो सिर्फ सत्ता से चिपके रहना चाहते हैं। अगर हमें तीस महीने का मौका मिला, तो हम वो कर दिखाएंगे जो इनसे तीस सालों में नहीं हुआ।”


कांग्रेस का बयान – बिहार में बदलाव की लहर चल पड़ी है

अशोक गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “देश और बिहार दोनों को अब बदलाव की जरूरत है। बेरोजगारी, महंगाई, किसानों और युवाओं की समस्याओं से लोग परेशान हैं। जनता इस बार एक नई दिशा में वोट करेगी और महागठबंधन उसे रास्ता दिखाएगा।”
उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव का नेतृत्व और महागठबंधन की एकजुटता बिहार में नया अध्याय लिखेगी।


तनाव के बाद एकता का प्रदर्शन

कुछ दिनों पहले तक सीट बंटवारे और सीएम चेहरे को लेकर महागठबंधन में मतभेदों की खबरें आम थीं। लेकिन बुधवार को स्थिति पूरी तरह बदल गई।
अशोक गहलोत की पटना में लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से हुई बैठक के बाद सब कुछ स्पष्ट हो गया। गहलोत ने कहा, “गठबंधन एकजुट है और बिहार में एनडीए को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है।”


राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महागठबंधन के इस फैसले से एनडीए पर दबाव बढ़ गया है। तेजस्वी यादव के युवा नेतृत्व और मुकेश सहनी के सामाजिक समीकरण से विपक्ष को मजबूती मिलेगी।
अब देखना यह होगा कि क्या यह महागठबंधन का मास्टरस्ट्रोक बिहार की सियासत में गेमचेंजर साबित होता है या नहीं।

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