साल 2025 में सोने और चांदी की कीमतों ने निवेशकों को चौंका दिया है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच लोगों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा है। चांदी ने इस साल अब तक करीब 135 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की है, जबकि सोना भी लगातार नई ऊंचाइयों को छूता नजर आया। हालांकि शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में सर्राफा बाजार में हल्की गिरावट देखी गई।
आज के ताजा भाव
देशभर में सोना और चांदी अभी भी ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। चांदी की कीमत करीब 2,11,100 रुपये प्रति किलो के आसपास बनी हुई है। मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,34,850 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,23,610 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। यह दाम जीएसटी और मेकिंग चार्ज को छोड़कर बताए गए हैं।
प्रमुख शहरों में सोने के दाम
राजधानी दिल्ली और जयपुर में 24 कैरेट सोना लगभग 1,35,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बना हुआ है। अहमदाबाद में इसकी कीमत करीब 1,34,900 रुपये है। वहीं पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे शहरों में 24 कैरेट सोना लगभग 1,34,850 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है।
22 कैरेट सोने की बात करें तो दिल्ली और जयपुर में इसके भाव 1,23,760 रुपये, अहमदाबाद में 1,23,660 रुपये और पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु व कोलकाता में 1,23,610 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किए गए।
विदेशी बाजार से मिले संकेत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की सप्लाई से जुड़े आंकड़े भी अहम माने जा रहे हैं। स्विस कस्टम्स के अनुसार नवंबर में स्विट्जरलैंड से सोने के निर्यात में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। फरवरी के बाद भारत को भेजे गए सोने में यह सबसे बड़ी कमी बताई जा रही है।
भारत को सोने की सप्लाई घटी
आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में भारत को करीब 26 टन सोना मिला था, जबकि नवंबर में यह घटकर सिर्फ 2 मीट्रिक टन रह गया। इसके उलट चीन और अन्य देशों को सोने का निर्यात बढ़ा है, जो 2 टन से बढ़कर लगभग 12 टन तक पहुंच गया है।
आगे क्या रह सकता है रुझान
बाजार जानकारों का कहना है कि वैश्विक तनाव, रुपये में कमजोरी, ऊंची महंगाई और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के कारण सोना और चांदी लंबी अवधि में मजबूत बने रह सकते हैं। हालांकि छोटी अवधि में मुनाफावसूली के चलते कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
कीमतें कैसे तय होती हैं
सोने और चांदी की कीमतें रोजाना कई वजहों से बदलती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम डॉलर में तय होते हैं, इसलिए डॉलर-रुपया विनिमय दर का असर पड़ता है। इसके अलावा आयात शुल्क, टैक्स, वैश्विक आर्थिक हालात, शादी-ब्याह और त्योहारों की मांग भी इनकी कीमतों को प्रभावित करती है। यही कारण है कि सोना-चांदी निवेश और परंपरा दोनों के लिहाज से अहम बने हुए हैं।