केंद्रीय बजट से पहले 29 जनवरी 2026 को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया। इस रिपोर्ट में बीते एक साल के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति, उपलब्धियां और चुनौतियों का पूरा लेखा-जोखा दिया गया है। आर्थिक सर्वे सरकार को बजट बनाने की दिशा और प्राथमिकताएं तय करने में मदद करता है।
वित्त वर्ष 2027 में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह संकेत देता है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और आगे भी विकास की रफ्तार बनाए रख सकती है।
AI पर पहली बार अलग चैप्टर
इस बार के आर्थिक सर्वे की एक खास बात यह है कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर पहली बार अलग से एक पूरा अध्याय शामिल किया गया है। इससे साफ है कि आने वाले समय में सरकार नई तकनीकों पर खास ध्यान देने वाली है। रिपोर्ट में बताया गया है कि AI से रोजगार, उत्पादकता और शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव आ सकते हैं।
वैश्विक अनिश्चितताओं को ध्यान में रखकर सर्वे
रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर चल रही आर्थिक अनिश्चितताओं का भी जिक्र किया गया है। इसी वजह से इस बार आर्थिक सर्वेक्षण को ज्यादा व्यापक बनाया गया है, ताकि दुनिया की घटनाओं का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर कम से कम पड़े और समय रहते सही नीतियां बनाई जा सकें।
कुल 16 अध्यायों में तैयार रिपोर्ट
आर्थिक सर्वेक्षण को कुल 16 अध्यायों में तैयार किया गया है। इनमें आर्थिक विकास, महंगाई, रोजगार, व्यापार, वित्तीय स्थिति, कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र जैसे अहम विषयों को शामिल किया गया है।
क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण?
आर्थिक सर्वेक्षण एक आधिकारिक सरकारी दस्तावेज होता है, जिसे हर साल बजट से पहले संसद में पेश किया जाता है। इसमें देश की आर्थिक हालत, भविष्य की संभावनाएं और प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण किया जाता है। यह रिपोर्ट केंद्रीय वित्त मंत्रालय की टीम तैयार करती है और इसे संसद में मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) पेश करते हैं।
बजट की दिशा तय करता है सर्वे
आर्थिक सर्वे को आने वाले बजट की नींव माना जाता है। इसके आधार पर सरकार तय करती है कि किस क्षेत्र को कितना समर्थन देना है और किन सुधारों पर फोकस करना है।