आम आदमी पार्टी का दावा है कि जो काम देश और दुनिया के कई राजनीतिक दल सोच भी नहीं पाते, उसे अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में AAP सरकारों ने जमीन पर उतारकर दिखाया है। पंजाब में शुरू की जा रही यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम को इसी नई सोच का उदाहरण बताया जा रहा है।
हर पंजाबी को बराबर अधिकार
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अमीर-गरीब, जाति, धर्म या उम्र का कोई भेद नहीं रखा गया है। शर्त सिर्फ एक है—व्यक्ति पंजाबी होना चाहिए। इसके तहत भगवंत मान सरकार हर पात्र नागरिक को ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज मुहैया कराएगी।
प्राइवेट अस्पतालों में भी सुविधा
सरकार के अनुसार, यह योजना सिर्फ सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगी। पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में भी बिना पैसे दिए इलाज कराया जा सकेगा। इससे उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो महंगे इलाज के कारण निजी अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाते थे।
मिडिल क्लास और गरीबों को बड़ी राहत
इस स्कीम को खासतौर पर गरीब और मिडिल क्लास परिवारों के लिए गेम चेंजर बताया जा रहा है। इलाज के खर्च से बचत होने पर परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा और वे बेहतर जीवन जी सकेंगे।
पुरानी सरकारों पर सवाल
इस मौके पर यह सवाल भी उठाया गया कि क्या पिछले 77 वर्षों में कांग्रेस या बीजेपी की किसी सरकार ने आम आदमी, खासकर गरीब और मिडिल क्लास के लिए इतनी व्यापक और समान स्वास्थ्य सुविधा लागू की है। AAP नेताओं का कहना है कि यह योजना राजनीति से ऊपर उठकर जनहित में बनाई गई है।
स्वास्थ्य सुरक्षा की नई दिशा
मान सरकार का दावा है कि यह योजना पंजाब में स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देगी और इलाज को अधिकार के रूप में स्थापित करेगी, न कि किसी की आर्थिक क्षमता पर निर्भर सुविधा के रूप में।