ट्रंप की चेतावनी से हिला बाजार: भारतीय चावल कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट

सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार कमजोर शुरुआत के साथ खुला और पूरे दिन दबाव में दिखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बने रहे। इस बीच कृषि और खाद्य उत्पाद क्षेत्र से जुड़ी कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने चावल आयात पर नए टैरिफ लगाने के संकेत दिए हैं।


भारतीय निर्यातकों पर सीधे असर के संकेत

मंगलवार सुबह बाजार खुलते ही एलटी फूड्स, जीआरएम ओवरसीज, केआरबीएल, कावेरी सीड्स और एसडब्ल्यूएएल एग्री बिजनेस जैसी कंपनियों के शेयर अचानक भारी दबाव में आ गए। ये सभी कंपनियां चावल और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात से जुड़ी हैं और अमेरिकी बाज़ार में इनकी हिस्सेदारी भी है।
ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों में घबराहट बढ़ी और इन कंपनियों के शेयर तेजी से फिसल गए।


क्यों नाराज़ हुए ट्रंप? जानें पूरा मामला

व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत, वियतनाम और थाईलैंड की चावल डंपिंग नीति पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि ये देश अमेरिका में बेहद कम कीमत पर चावल भेजकर अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

इसके साथ ही ट्रंप ने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट से यह भी पूछा कि क्या भारत को चावल के मामले में किसी तरह की विशेष रियायत दी जा रही है?
उनके इस बयान के बाद यह आशंका बढ़ गई है कि अमेरिका चावल पर अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है, जिससे भारतीय निर्यातकों पर सीधा असर पड़ेगा।


भारत पर क्यों बढ़ सकता है दबाव?

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है।
वित्त वर्ष 2024-25 में:

  • वैश्विक चावल उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी: लगभग 28%
  • दुनिया के कुल चावल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी: करीब 30%

अगर अमेरिका टैरिफ बढ़ाता है, तो भारतीय कंपनियों को झटका लगेगा और निर्यात कम होने की संभावना है।
बाजार में यही चिंता आज भारी गिरावट की वजह बनी।


कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट

ट्रंप की चेतावनी के बाद जिन कंपनियों पर सबसे बड़ा असर दिखा:

  • LT Foods – करीब 8% की गिरावट, 362 रुपये के करीब ट्रेड
  • GRM Overseas – लगभग 5.4% नीचे
  • KRBL – लगभग 2.7% की गिरावट
  • SWAL Agri – करीब 2.3% टूटा
  • Kaveri Seeds – लगभग 2% फिसला

निवेशकों के मुताबिक, जब तक अमेरिका की नीति पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक इस सेक्टर में उथल-पुथल जारी रहने की संभावना है।

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