224 दिन बाद जेल से बाहर आए बिक्रम सिंह मजीठिया, सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया मंगलवार को पटियाला की नाभा जेल से बाहर आ गए। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई हुई। मजीठिया करीब 224 दिन से जेल में बंद थे। उन्हें 25 जून 2025 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया था। जेल से बाहर आते ही उनके समर्थकों में उत्साह देखा गया और राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को अहम माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
सोमवार, 3 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया को जमानत देने का आदेश दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने उनकी याचिका पर सुनवाई की। मजीठिया ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह मानते हुए जमानत दी कि आरोपी लंबे समय से हिरासत में हैं और मामले की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है।

लंबे समय से जेल में बंद रहने पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मजीठिया पिछले करीब सात महीनों से जेल में हैं। इससे पहले, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 4 दिसंबर 2025 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट का मानना था कि मजीठिया के बाहर आने पर जांच प्रभावित होने की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, हाईकोर्ट ने विजिलेंस ब्यूरो को तीन महीने में जांच पूरी करने का निर्देश भी दिया था।

540 करोड़ रुपये की संपत्ति का आरोप
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय से कहीं ज्यादा, करीब 540 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई। इसी मामले में उन्हें जून 2025 में गिरफ्तार किया गया था। यह मामला 2021 में दर्ज ड्रग्स केस की जांच से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जिसकी जांच के दौरान यह नया एंगल सामने आया।

पहले भी मिल चुकी है जमानत
सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एस. मुरलीधर ने दलील दी कि उन्हें पहले भी एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामले में जमानत मिल चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि उस जमानत को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।

राजनीतिक असर और आगे की राह
मजीठिया की रिहाई से पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आने वाले समय में अदालत का अगला रुख क्या होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *