केंद्रीय बजट 2026 अब नजदीक है। 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना लगातार नौवां बजट पेश करेंगी। बजट से पहले देश के अलग-अलग सेक्टर सरकार से अपनी उम्मीदें जता रहे हैं। इनमें ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री भी शामिल है, जो बीते साल किए गए जीएसटी सुधार से काफी मजबूत हुई है।
सितंबर 2025 में लागू हुए जीएसटी 2.0 सुधार के बाद गाड़ियों की कीमतें घटीं और बिक्री में तेज उछाल देखने को मिला। इससे ऑटो कंपनियों को बड़ा फायदा हुआ और सेक्टर को नई रफ्तार मिली। हालांकि इंडस्ट्री का मानना है कि अब इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए बजट 2026 में और सहयोग की जरूरत है।
स्थिर नीति की सबसे बड़ी मांग
ऑटो इंडस्ट्री चाहती है कि सरकार लंबे समय तक चलने वाली और स्थिर पॉलिसी बनाए। कंपनियों का कहना है कि गाड़ी विकसित करने में कई साल लगते हैं, ऐसे में नियमों में बार-बार बदलाव से योजना बनाना मुश्किल हो जाता है। अगर नीतियां साफ और स्थिर होंगी तो विदेशी निवेश बढ़ेगा और भारत में नई तकनीक व मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।
GST में और राहत की उम्मीद
इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) गाड़ियों को जीएसटी कट का बड़ा फायदा मिला है, लेकिन हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों पर अभी भी टैक्स ज्यादा है। ऑटो कंपनियां चाहती हैं कि इन वाहनों पर टैक्स घटे, ताकि इनकी कीमत पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के करीब आ सके।
दोपहिया कंपनियों का कहना है कि छोटे इंजन वाली बाइक्स पर टैक्स स्ट्रक्चर एक जैसा होना चाहिए। वहीं, 350cc से ज्यादा इंजन वाली बाइक्स पर ज्यादा टैक्स के कारण उनकी कीमत बढ़ रही है, जिससे बिक्री प्रभावित हो रही है।
EV इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सरकार से बड़ी पहल की उम्मीद कर रही हैं। खासकर पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने की मांग की जा रही है। इंडस्ट्री का मानना है कि बेहतर चार्जिंग नेटवर्क, टैक्स में राहत और आसान फाइनेंस से लोग तेजी से ईवी अपनाएंगे। सरकार भी कई बार कह चुकी है कि आने वाले समय में ईवी की कीमतें पेट्रोल गाड़ियों के बराबर होंगी।
मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन मजबूत करने की जरूरत
बीते कुछ सालों में सप्लाई चेन की समस्याओं से ऑटो सेक्टर को नुकसान हुआ है। इसलिए कंपनियां लोकल मैन्युफैक्चरिंग, घरेलू पार्ट्स और सप्लायर डेवलपमेंट पर जोर देने की मांग कर रही हैं। जरूरी कंपोनेंट्स पर टैक्स कम करने से लागत घटेगी और आयात पर निर्भरता भी कम होगी।
रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस
ऑटो सेक्टर भविष्य की तैयारी के लिए रिसर्च, नई तकनीक और स्किल डेवलपमेंट में निवेश बढ़ा रहा है। इंडस्ट्री चाहती है कि सरकार आरएंडडी और ट्रेनिंग पर टैक्स छूट दे। इससे रोजगार बढ़ेगा, इनोवेशन को बल मिलेगा और भारत का ऑटो सेक्टर नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।