दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में मंगलवार, 27 जनवरी की सुबह से ही मौसम ने अचानक करवट ले ली। आसमान में घने काले बादल छाए रहे और दोपहर करीब 12 बजे से गरज-चमक के साथ हल्की बारिश शुरू हो गई। बीते कुछ दिनों से लग रहा था कि सर्दी अब विदा लेने वाली है, लेकिन इस बदले मौसम ने लोगों को फिर से कंबल और गर्म कपड़ों की ओर लौटा दिया।
बारिश के साथ चलीं तेज हवाएं
मौसम विभाग ने पहले ही अनुमान जताया था कि दिन में हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। यह अनुमान पूरी तरह सही साबित हुआ। बारिश के दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं, जिससे ठंड का अहसास और बढ़ गया। खुले इलाकों में ठिठुरन ज्यादा महसूस की गई और तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
न्यूनतम तापमान में गिरावट
मंगलवार सुबह दिल्ली का न्यूनतम तापमान करीब 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अलग-अलग इलाकों में तापमान में थोड़ा-बहुत फर्क देखने को मिला। सफदरजंग में तापमान सामान्य से थोड़ा कम रहा, जबकि पालम, लोधी रोड, रिज और अयानगर जैसे इलाकों में भी तापमान 8 से 9 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। ठंडी हवाओं के कारण तापमान भले ही बहुत ज्यादा न गिरा हो, लेकिन ठंड का असर ज्यादा महसूस हुआ।
अधिकतम तापमान भी रहा कम
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, दिन का अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने दिल्ली के लिए बारिश को लेकर येलो अलर्ट भी जारी किया है। इसके तहत लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विभाग के मुताबिक, दोपहर तक एक या दो बार हल्की बारिश और बिजली चमकने की संभावना बनी रहेगी।
बारिश बनी लोगों की परेशानी
दिल्ली-एनसीआर में बारिश चाहे हल्की ही क्यों न हो, लोगों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। कई इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया, जिससे ट्रैफिक की रफ्तार धीमी हो गई। दफ्तर जाने वाले लोगों और स्कूल बसों को जाम का सामना करना पड़ा। फिसलन की वजह से वाहन चालकों को भी काफी सावधानी बरतनी पड़ी।
बारिश के बाद भी बढ़ा प्रदूषण
आमतौर पर बारिश से हवा साफ होने की उम्मीद की जाती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। कुछ दिनों तक बेहतर स्थिति में रहने के बाद दिल्ली की हवा फिर से खराब हो गई। वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI करीब 300 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है।
आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई इलाकों में हवा ‘बेहद खराब’ स्तर पर रही, जबकि कुछ जगहों पर ‘खराब’ और गिने-चुने केंद्रों पर ही ‘मध्यम’ स्थिति दर्ज की गई।