महिला प्रीमियर लीग 2026 का चौथा सीजन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। अब तक 15 मुकाबले खेले जा चुके हैं और आज रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और मुंबई इंडियंस (MI) के बीच अहम मुकाबला खेला जाएगा। इस समय सिर्फ आरसीबी ने प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की की है, जबकि बाकी दो स्थानों के लिए चारों टीमों की उम्मीदें अब भी जिंदा हैं।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु: सबसे मजबूत दावेदार
स्मृति मंधाना की कप्तानी में आरसीबी ने शानदार प्रदर्शन किया है। टीम ने अब तक 6 में से 5 मैच जीते हैं और उसके 10 अंक हैं। टीम का नेट रन रेट (+1.236) भी बाकी सभी से बेहतर है।
आरसीबी के अभी दो मैच बचे हैं—एक आज मुंबई के खिलाफ और दूसरा 29 जनवरी को यूपी वॉरियर्स के खिलाफ। आरसीबी का प्लेऑफ टिकट पहले ही कंफर्म हो चुका है और मजबूत नेट रन रेट के कारण उसके टॉप पर रहते हुए सीधे फाइनल में पहुंचने की पूरी संभावना है।
दिल्ली कैपिटल्स: जीत ही आसान रास्ता
दिल्ली कैपिटल्स फिलहाल अंक तालिका में दूसरे नंबर पर है। टीम ने 6 में से 3 मैच जीते हैं और उसके 6 अंक हैं। हालांकि उसका नेट रन रेट (-0.169) ज्यादा मजबूत नहीं है।
अगर दिल्ली अपने दोनों बचे मैच जीत लेती है, तो बिना किसी गणित के वह सीधे प्लेऑफ में पहुंच जाएगी। एक जीत भी उसे मजबूत स्थिति में ला सकती है, लेकिन दोनों मैच हारने पर उसकी राह बेहद मुश्किल हो जाएगी।
गुजरात जायंट्स: नेट रन रेट बना चुनौती
गुजरात जायंट्स भी 3 जीत और 3 हार के साथ 6 अंकों पर है, लेकिन उसका नेट रन रेट (-0.341) दिल्ली से कमजोर है। टीम के अगले मुकाबले दिल्ली और मुंबई से हैं।
गुजरात को कम से कम एक मैच जीतना जरूरी है। अगर वह दिल्ली को हरा देती है, तो उसकी प्लेऑफ की उम्मीदें मजबूत होंगी। हालांकि कई हालात में उसे दूसरे मैचों के नतीजों पर भी नजर रखनी होगी।
मुंबई इंडियंस: दो जीत से सीधा क्वालीफाई
दो बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस फिलहाल चौथे स्थान पर है। टीम के 4 अंक हैं, लेकिन उसका नेट रन रेट (0.046) यूपी और गुजरात से बेहतर है।
मुंबई के बचे मैच आरसीबी और गुजरात के खिलाफ हैं। अगर मुंबई दोनों मैच जीत जाती है, तो वह सीधे प्लेऑफ में पहुंच जाएगी। एक जीत की स्थिति में उसे बाकी टीमों के नतीजों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
यूपी वॉरियर्स: सबसे कठिन रास्ता
यूपी वॉरियर्स के लिए राह सबसे मुश्किल है। टीम ने 6 में से सिर्फ 2 मैच जीते हैं, उसके 4 अंक हैं और नेट रन रेट (-0.769) काफी खराब है।
यूपी को अपने दोनों मैच जीतने के साथ-साथ दूसरी टीमों के नतीजों पर भी पूरी तरह निर्भर रहना होगा। यानी उनके लिए प्लेऑफ की उम्मीदें बेहद कम, लेकिन अभी खत्म नहीं हुई हैं।