भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के सामने लगातार कमजोर होता जा रहा है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया नए सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया नौ पैसे की गिरावट के साथ 90.87 प्रति डॉलर पर खुला। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली को रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह माना जा रहा है।
ट्रेड डील पर असमंजस का असर
फॉरेक्स बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशक फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील को लेकर किसी ठोस घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। जब तक इस दिशा में स्पष्टता नहीं आती, तब तक रुपये पर दबाव बने रहने की संभावना है। इसी कारण बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
हालांकि, डॉलर में हल्की नरमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये की गिरावट को और ज्यादा गहराने से कुछ हद तक रोका है।
दिनभर कैसा रहा रुपये का कारोबार
अंतरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया अपने अब तक के सबसे कमजोर स्तर 90.87 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 90.77 से 90.87 प्रति डॉलर के बीच रहा। इससे पहले सोमवार को भी रुपया 90.78 के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे दिन रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचना यह दिखाता है कि घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है।
डॉलर इंडेक्स और शेयर बाजार का प्रभाव
इस दौरान छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.27 पर रहा। डॉलर में आई इस हल्की कमजोरी से रुपये को थोड़ी राहत मिली, लेकिन यह गिरावट को थामने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली।
- सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 363.92 अंक गिरकर 84,849.44 पर आ गया।
- निफ्टी 106.65 अंक टूटकर 25,920.65 के स्तर पर पहुंच गया।
शेयर बाजार में गिरावट ने भी रुपये पर नकारात्मक असर डाला।
कच्चे तेल की कीमतों से राहत
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रुपये के लिए राहत की खबर रही। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.61 प्रतिशत गिरकर 60.19 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इससे भारत के आयात खर्च में कमी आने की उम्मीद है, जो आगे चलकर रुपये को सहारा दे सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
रुपये की कमजोरी की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी है। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुद्ध रूप से 1,468.32 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेश वापस नहीं आता और बाजार में भरोसा नहीं बनता, तब तक रुपये की स्थिति कमजोर रह सकती है।
आगे की राह क्या होगी
विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले दिनों में रुपये की चाल वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े संकेतों पर निर्भर करेगी। फिलहाल कमजोर रुपया अर्थव्यवस्था और निवेशकों दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।