संसद में AAP सांसद मलविंदर कंग का हमला: “पंजाब को कमजोर करने की कोशिशें जारी”

आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने संसद में एक बार फिर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जहां-जहां सरकार को राजनीतिक फायदा नहीं मिल रहा, वहां ऐसे राज्यों के खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से साज़िशें रची जा रही हैं। कंग का आरोप है कि पंजाब—जिसने देश के लिए सबसे अधिक शहादतें दीं—उसी पंजाब की राजधानी को लेकर केंद्र स्तर पर चिंताजनक कदम उठाए जा रहे हैं।


“विभाजन से लेकर अब तक पंजाब को ही नुकसान”

कंग ने कहा कि देश के विभाजन के समय सबसे बड़ी मार पंजाब और पश्चिम बंगाल के लोगों ने झेली थी। लाखों लोगों का विस्थापन हुआ, हजारों परिवार टूटाे। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब का केवल 1947 में ही नहीं, बल्कि उसके बाद हरियाणा के अलग होने पर भी बड़ा नुकसान हुआ। इसके बावजूद पंजाब ने देश की रक्षा और विकास में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है।


“वंदे मातरम् की बहस चुनावी मुद्दा बन चुकी है”

सदन में वंदे मातरम् पर चल रही बहस पर AAP सांसद ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, यह चर्चा देश की एकता और सम्मान के लिए होनी चाहिए थी, लेकिन इसे आने वाले चुनावों के लिए भावनाएं भड़काने का साधन बना दिया गया है।

कंग ने कहा कि इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार सच में वंदे मातरम् की भावना—एकता, समानता और सम्मान—को निभा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अल्पसंख्यकों की आवाज़ को दबाने की कोशिशें बढ़ रही हैं, जो चिंताजनक है।


गुरु तेग बहादुर साहिब और आज़ादी के नायकों की मिसाल

अपने संबोधन के दौरान कंग ने गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहादत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा इस ऐतिहासिक अवसर का उल्लेख करना अच्छा है, लेकिन इसकी मूल भावना—मानव अधिकारों की रक्षा—पर चर्चा होना ज़रूरी था।

उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर साहिब ने कश्मीरी पंडितों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपनी जान दी थी। कंग ने साथ ही करतार सिंह सराभा, गदरी बाबाओं, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद जैसे वीरों का भी स्मरण किया, जिन्होंने देश की एकता और भाईचारे के लिए संघर्ष किया।


“देश को जोड़ने की जरूरत, बांटने की नहीं”

अंत में कंग ने कहा कि सरकार को वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर देश की एकता, विविधता और संविधानिक अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा—“अगर हम सच में वंदे मातरम् का सम्मान करना चाहते हैं, तो देश के हर नागरिक की आवाज़ और अधिकार की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।”

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