भारत में वाहनों की सुरक्षा सुधारने की दिशा में सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने Bharat NCAP 2.0 का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसे AIS-197 Revision 1 कहा जा रहा है। यह नया सिस्टम अक्टूबर 2027 से लागू होने की तैयारी में है। इस बार रेटिंग प्रक्रिया पहले से अधिक व्यापक और तकनीकी होगी। कारों को दी जाने वाली स्टार रेटिंग अब पाँच अलग-अलग सुरक्षा श्रेणियों के आधार पर तय की जाएगी।
क्रैश टेस्ट होंगे और कड़े
नए मानकों में सबसे बड़ा बदलाव क्रैश टेस्ट प्रक्रिया में किया गया है। कुल रेटिंग में 55% वेटेज क्रैश परफॉर्मेंस का रहेगा। लेकिन पहले की तुलना में अब टेस्ट ज्यादा सख्त होंगे। कार कंपनियाँ सिर्फ एयरबैग और थोड़ी मजबूत बॉडी के दम पर 5-स्टार नहीं हासिल कर पाएंगी।
अब पाँच मुख्य क्रैश टेस्ट अनिवार्य होंगे, जो गाड़ी की टक्कर झेलने की क्षमता, टक्कर के बाद यात्रियों की सुरक्षा, और इंजन व केबिन के नुकसान जैसे कई कारकों को गहराई से परखेंगे।
ADAS तकनीक पर भी मिलेगा स्कोर
भारत में पहले कारों की सुरक्षा केवल उनकी संरचना और एयरबैग तक सीमित थी। लेकिन अब ADAS तकनीक को अलग 10% स्कोर दिया जाएगा।
इनमें शामिल हैं:
- ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग
- लेन कीपिंग असिस्ट
- फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग
इन फीचर्स के आने से ड्राइवर की गलतियों से होने वाले हादसे कम होने की उम्मीद है।
पैदल यात्रियों और दोपहिया चालकों की सुरक्षा पर जोर
नए नियमों में पैदल यात्रियों और बाइक सवारों की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण जगह मिली है। इस श्रेणी का वेटेज 20% रखा गया है।
अब गाड़ियों के फ्रंट डिज़ाइन की टेस्टिंग इस तरह की जाएगी कि टक्कर की स्थिति में पैदल यात्रियों के सिर और पैरों को कम चोट पहुँचे। वहीं AEB सिस्टम में पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहनों की पहचान भी अनिवार्य होगी।
क्यों लाया जा रहा है नया सिस्टम?
भारत सड़क हादसों के मामले में दुनिया के सबसे प्रभावित देशों में शामिल है। इनमें से अधिकांश हादसों में जान बचाई जा सकती है, अगर गाड़ियों में अच्छी सुरक्षा तकनीक हो।
Bharat NCAP 2.0 का उद्देश्य यही है कि:
- कार कंपनियाँ मजबूर हों कि वे बेहतर, सुरक्षित वाहन बनाएँ
- नई तकनीक वाली गाड़ियाँ आम लोगों तक पहुँच सके
- अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा मानक भारत में लागू हों
Bharat NCAP 2.0 आने के बाद बाजार में नई कारों की सुरक्षा पहले से कहीं बेहतर होगी और ग्राहकों को असली मायनों में सुरक्षित गाड़ियाँ मिल सकेंगी।