बांग्लादेश इस समय भारी राजनीतिक तनाव से गुजर रहा है। इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल आज पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ बहुचर्चित मामले में अपना फैसला सुनाने वाला है। इस फैसले को राजधानी ढाका के कई स्थानों पर बड़े स्क्रीन पर लाइव दिखाया जाएगा और लोग इसे फेसबुक पर भी देख सकेंगे। फैसले से पहले पूरे देश में माहौल बेहद चिंताजनक है।
सड़कें बनी रणक्षेत्र, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर
अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस की सरकार ने किसी भी तरह की हिंसा, आगजनी या बमबारी करने वालों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया है। बीते दिनों ढाका सहित कई जिलों में देसी बम विस्फोट, बसों में आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ और पुलिस पर हमले जैसे घटनाक्रम सामने आए हैं। पुलिस आयुक्त का कहना है कि जानलेवा हमले करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शेख हसीना का संदेश– “मैं डरने वाली नहीं”
फैसला आने से कुछ घंटे पहले शेख हसीना ने एक ऑडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, “अन्याय करने वालों को जनता खुद सजा देगी। मैं देश की जनता के लिए जिंदा हूं और जिंदा रहूंगी।”
उनकी पार्टी अवामी लीग को पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका है और चुनाव लड़ने पर रोक लगी हुई है।
सजीब वाजेद की चेतावनी— चुनाव रुक सकते हैं
हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने दावा किया है कि उनकी पार्टी पर प्रतिबंध नहीं हटाया गया तो फरवरी में होने वाले चुनाव बाधित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अंदेशा है कि कोर्ट का फैसला कड़ा होगा और उनकी मां को मौत की सजा भी सुनाई जा सकती है।
उन्होंने साफ किया कि उनकी मां भारत में पूरी सुरक्षा के साथ रह रही हैं।
ढाका में हिंसा का सिलसिला जारी
देशभर में कई जगह हिंसक घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं। ढाका में मोहम्मद यूनुस के सलाहकार सैयद रिजवाना हसन के घर के बाहर क्रूड बम फेंके गए और वहां आगजनी भी हुई। कॉक्सबाजार और अन्य शहरों में भी अवामी लीग समर्थकों के साथ टकराव की खबरें हैं। ढाका के एक पुलिस स्टेशन के वाहन डंपिंग क्षेत्र में भी अज्ञात लोगों ने आग लगा दी।
कौन हैं आरोपी?
इस मामले में तीन प्रमुख आरोपी हैं—
- शेख हसीना, जो वर्तमान में भारत में हैं।
- पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल
- पूर्व पुलिस प्रमुख अब्दुल्ला अल मामून, जो सरकारी गवाह बन चुके हैं।
सरकारी पक्ष हसीना के लिए अधिकतम सजा और उनकी संपत्ति जब्त करने की मांग कर चुका है।
आरोपों की पृष्ठभूमि
ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना पर 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध करने के आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में मौतें हुई थीं। यह मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में चला और 2025 में आरोप तय किए गए।